निरुणद्धीन्द्रियाण्येव स सुखी स विचक्षण:॥
इन्द्रियाणां निरोधेन दानेन च दमेन च।
नर: सर्वमवाप्नोति मनसा यद् यदिच्छति॥
अनुवाद
जो अपनी इन्द्रियों को वश में रखता है, वही सुखी और विद्वान है। इन्द्रियों को वश में करके, दान करके और इन्द्रियों को वश में करके मनुष्य जो कुछ भी मन में चाहता है, उसे प्राप्त कर लेता है।
He who controls his senses is happy and learned. By controlling senses, by charity and by controlling senses, a man gets whatever he desires in his mind.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥