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mahabharat 13.154.d33: शिल्पकला या दस्तकारी और रंगमंच का काम आमतौर पर निचली जातियों के लोग करते हैं। दस्तकारी और रंगमंच में भी उचित न्याय के अनुसार मजदूरी ली जानी चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 13.154: अहिंसाकी और इन्द्रिय-संयमकी प्रशंसा तथा दैवकी प्रधानता   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.154.d33 
कारुकर्म च नाट्यं च प्रायशो नीचयोनिषु।
तयोरपि यथायोगं न्यायत: कर्मवेतनम्॥
 
 
अनुवाद
शिल्पकला या दस्तकारी और रंगमंच का काम आमतौर पर निचली जातियों के लोग करते हैं। दस्तकारी और रंगमंच में भी उचित न्याय के अनुसार मजदूरी ली जानी चाहिए।
 
Craftsmanship or craftsmanship and theatre work are usually done by people of lower castes. In craftsmanship and theatre too, wages should be taken as per the appropriate justice.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)