Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.154.d24: देवी! ऐसा करने से ही मनुष्य को विद्या का फल प्राप्त होता है, अन्यथा नहीं। न्याय का पालन करते हुए ही विद्या का फल प्राप्त करने की इच्छा करनी चाहिए। वहीं अधर्म का सर्वथा त्याग करना चाहिए। | mahabharat अध्याय 13.154: अहिंसाकी और इन्द्रिय-संयमकी प्रशंसा तथा दैवकी प्रधानता । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं विद्याफलं देवि प्राप्नुयान्नान्यथा नर:।
न्यायाद् विद्याफलानीच्छेदधर्मं तत्र वर्जयेत्॥
अनुवाद
देवी! ऐसा करने से ही मनुष्य को विद्या का फल प्राप्त होता है, अन्यथा नहीं। न्याय का पालन करते हुए ही विद्या का फल प्राप्त करने की इच्छा करनी चाहिए। वहीं अधर्म का सर्वथा त्याग करना चाहिए।
Devi! By doing this, a man can get the fruits of education, not otherwise. One should desire to get the fruits of education only by following justice. There, one should completely abandon unrighteousness.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥