| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 153: संक्षेपसे राजधर्मका वर्णन » श्लोक d7 |
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| | | | श्लोक 13.153.d7  | भयार्तानां भयात् त्राता दीनानुग्रहकारणात्।
कार्याकार्यविशेषज्ञो नित्यं राष्ट्रहिते रत:॥ | | | | | | अनुवाद | | राजा को भयभीत प्रजा की भय से रक्षा करनी चाहिए, दीन-दुखियों पर दया करनी चाहिए, कर्तव्य-अकर्तव्यों को विशेष रूप से समझना चाहिए तथा राष्ट्र के कल्याण में सदैव संलग्न रहना चाहिए। | | | | The king should protect fearful people from fear, be kind to the poor, understand the duties and non-duties especially and always remain engaged in the welfare of the nation. | | ✨ ai-generated | | |
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