Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.151.d41: वह प्रसन्नचित्त और सबका प्रिय हो, लोगों को जीविका प्रदान करने वाला हो तथा उनके साथ अच्छा व्यवहार करने वाला हो। उसके लिए यह उचित नहीं है कि वह किसी से पापपूर्ण, कटु या कठोर वचन बोले। | mahabharat अध्याय 13.151: राजधर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह प्रसन्नचित्त और सबका प्रिय हो, लोगों को जीविका प्रदान करने वाला हो तथा उनके साथ अच्छा व्यवहार करने वाला हो। उसके लिए यह उचित नहीं है कि वह किसी से पापपूर्ण, कटु या कठोर वचन बोले।
He should be cheerful and loved by all and should provide livelihood to people and behave well with them. It is never appropriate for him to speak sinful, harsh or harsh words to anyone.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥