Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.151.d4: यह राजा नाना प्रकार से मनुष्यों को दण्ड और फटकार देता है। मृत्यु के पश्चात् इसे पुण्यात्माओं का लोक कैसे प्राप्त होता है? हे महात्मन! अतः मैं राजा के आचरण और व्यवहार का वर्णन सुनना चाहता हूँ। | mahabharat अध्याय 13.151: राजधर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स चापि दण्डयन् मर्त्यान् भर्त्सयन् विविधानपि।
प्रेत्यभावे कथं लोकाँल्लभते पुण्यकर्मणाम्॥
राजवृत्तमहं तस्माच्छ्रोतुमिच्छामि मानद।
अनुवाद
यह राजा नाना प्रकार से मनुष्यों को दण्ड और फटकार देता है। मृत्यु के पश्चात् इसे पुण्यात्माओं का लोक कैसे प्राप्त होता है? हे महात्मन! अतः मैं राजा के आचरण और व्यवहार का वर्णन सुनना चाहता हूँ।
This king punishes and rebukes people in various ways. How does he attain the world of virtuous souls after death? O Honorable! Therefore, I want to hear the description of the conduct and behavior of the king.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥