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mahabharat 13.151.d3: मनुष्यों में देखा जाने वाला यह राजा अन्य मनुष्यों के समान ही आत्मा, सिर और धड़ वाला है; फिर किस कर्म के कारण यह सबमें श्रेष्ठ स्थान का अधिकारी हुआ है?   |   mahabharat अध्याय 13.151: राजधर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.151.d3 
तुल्यप्राणशिर:कायो राजायमिति दृश्यते।
केन कर्मविपाकेन सर्वप्राधान्यमर्हति॥
 
 
अनुवाद
मनुष्यों में देखा जाने वाला यह राजा अन्य मनुष्यों के समान ही आत्मा, सिर और धड़ वाला है; फिर किस कर्म के कारण यह सबमें श्रेष्ठ स्थान का अधिकारी हुआ है?
 
This king seen among men has the same soul, head and torso as other men; then due to which deed has he become entitled to the top position among all?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)