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mahabharat 13.150.63: यदि वे मनुष्य कलियोग के कारण इस संसार में मनुष्य योनि में जन्म लेते हैं, तो वे होम और वषट्कार से मुक्त हो जाते हैं और पाप से मुक्त हो जाते हैं ॥63॥   |   mahabharat अध्याय 13.150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.150.63 
ते चेत्कालकृतोद्योगात् सम्भवन्तीह मानुषा:।
निर्होमा निर्वषट्कारास्ते भवन्ति नराधमा:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
यदि वे मनुष्य कलियोग के कारण इस संसार में मनुष्य योनि में जन्म लेते हैं, तो वे होम और वषट्कार से मुक्त हो जाते हैं और पाप से मुक्त हो जाते हैं ॥63॥
 
If those humans are born as human beings in this world due to Kalyoga, then they are free from Homa and Vashtakar and are free from evil. 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)