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mahabharat 13.150.61: श्री महेश्वर बोले- देवी! शास्त्र लोकधर्म की उन मर्यादाओं को स्थापित करते हैं, जो सबके हित के लिए बनाई गई हैं। जो लोग उन शास्त्रों को प्रमाण मानकर स्वीकार करते हैं, वे उत्तम व्रतों का दृढ़तापूर्वक पालन करते देखे जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.150.61 
श्रीमहेश्वर उवाच
आगमा लोकधर्माणां मर्यादा: सर्वनिर्मिता:।
प्रामाण्येनानुवर्तन्ते दृश्यन्ते च दृढव्रता:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले- देवी! शास्त्र लोकधर्म की उन मर्यादाओं को स्थापित करते हैं, जो सबके हित के लिए बनाई गई हैं। जो लोग उन शास्त्रों को प्रमाण मानकर स्वीकार करते हैं, वे उत्तम व्रतों का दृढ़तापूर्वक पालन करते देखे जाते हैं।
 
Shri Maheshwar said- Devi! The scriptures establish those limits of public religion, which are created for the benefit of all. Those who accept those scriptures as proof, are seen to follow the best vows firmly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)