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mahabharat 13.150.57: देवि! यह सत्पुरुषों का धर्म है, इसे कल्याणकारी समझना चाहिए। मैंने मनुष्यों के हित के लिए तुम्हें इस धर्म का उपदेश बहुत अच्छी तरह से दिया है। 57॥   |   mahabharat अध्याय 13.150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.150.57 
एष देवि सतां धर्मो मन्तव्यो भूतिकारक:।
नृणां हितार्थाय मया तव वै समुदाहृत:॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
देवि! यह सत्पुरुषों का धर्म है, इसे कल्याणकारी समझना चाहिए। मैंने मनुष्यों के हित के लिए तुम्हें इस धर्म का उपदेश बहुत अच्छी तरह से दिया है। 57॥
 
Goddess! This is the religion of good men, it should be considered beneficial. I have preached this religion to you very well for the benefit of humans. 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)