Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.150.17: इनके अतिरिक्त और भी लोग हैं जो सदैव अभिमानी और अहंकारी रहते हैं तथा पापकर्मों में लिप्त रहते हैं। ये मूर्ख लोग आसन देने योग्य व्यक्ति को भी आसन या चौकी नहीं देते। ॥17॥ | mahabharat अध्याय 13.150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपरे स्तम्भिनो नित्यं मानिन: पापतो रता:।
आसनार्हस्य ये पीठं न प्रयच्छन्त्यचेतस:॥ १७॥
अनुवाद
इनके अतिरिक्त और भी लोग हैं जो सदैव अभिमानी और अहंकारी रहते हैं तथा पापकर्मों में लिप्त रहते हैं। ये मूर्ख लोग आसन देने योग्य व्यक्ति को भी आसन या चौकी नहीं देते। ॥17॥
Besides these, there are other people too who are always proud and arrogant and indulge in sins. These fools do not even provide a stool or stool to a person who is worthy of being given a seat. ॥17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥