vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन
»
श्लोक 12
श्लोक
13.150.12
न धनानि न वासांसि न भोगान्न च काञ्चनम्।
न गावो नान्नविकृतिं प्रयच्छन्ति कदाचन॥ १२॥
अनुवाद
वे कभी धन, वस्त्र, अन्न, स्वर्ण, गौएँ अथवा अन्न से बने विविध प्रकार के खाद्य पदार्थ दान नहीं करते ॥12॥
They never donate money, clothes, food, gold, cows or various kinds of eatables made from grain. ॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×