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mahabharat 13.15.d2: जो समस्त विद्याओं के स्वामी, शरद ऋतु के चन्द्रमा के समान तेजस्वी और नेत्रों को सुखमय सौभाग्य प्रदान करने वाले थे। इस प्रकार मैंने भगवान महादेवजी के मनोहर रूप का दर्शन किया।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.15.d2 
(सर्वविद्याधिपं देवं शरच्चन्द्रसमप्रभम्।
नयनाह्लादसौभाग्यमपश्यं परमेश्वरम्॥ )
 
 
अनुवाद
जो समस्त विद्याओं के स्वामी, शरद ऋतु के चन्द्रमा के समान तेजस्वी और नेत्रों को सुखमय सौभाग्य प्रदान करने वाले थे। इस प्रकार मैंने भगवान महादेवजी के मनोहर रूप का दर्शन किया।
 
Who was the lord of all knowledge, as radiant as the autumn moon and the one who provided blissful good fortune to the eyes. In this way I saw the beautiful form of Lord Mahadevji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)