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mahabharat 13.15.96-97h: अत्रिमुनि के भय से वह तीन सौ वर्षों तक निराहार रही, मिट्टी पर सोती रही और भगवान शंकर की प्रसन्नता के लिए तप करती रही ॥96 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 96-97h
 
 
श्लोक  13.15.96-97h 
निराहारा भयादत्रेस्त्रीणि वर्षशतान्यपि॥ ९६॥
अशेत मुसलेष्वेव प्रसादार्थं भवस्य सा।
 
 
अनुवाद
अत्रिमुनि के भय से वह तीन सौ वर्षों तक निराहार रही, मिट्टी पर सोती रही और भगवान शंकर की प्रसन्नता के लिए तप करती रही ॥96 1/2॥
 
Due to the fear of Atrimuni, she remained fasting for three hundred years, slept on mud and kept doing penance for the happiness of Lord Shankar. 96 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)