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mahabharat 13.15.75: हे केशव! भगवान विष्णु का वह भयानक चक्र और इन्द्र का वह वज्र पूर्वकाल में उस लोक के अंगों पर पड़े हुए पुराने तिनकों के समान जीर्ण-शीर्ण हो गये थे।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.15.75 
विष्णोश्चक्रं च तद् घोरं वज्रमाखण्डलस्य च।
शीर्णं पुराभवत् तात ग्रहस्याङ्गेषु केशव॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
हे केशव! भगवान विष्णु का वह भयानक चक्र और इन्द्र का वह वज्र पूर्वकाल में उस लोक के अंगों पर पड़े हुए पुराने तिनकों के समान जीर्ण-शीर्ण हो गये थे।
 
O dear Keshav! That dreadful discus of Lord Vishnu and the thunderbolt of Indra had in the past become worn out like old straws on the limbs of that planet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)