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mahabharat 13.15.70-71h: जनार्दन! यहाँ अनेक देवता और ऋषिगण तप, ब्रह्मचर्य, सत्य और संयम के द्वारा देवताओं में श्रेष्ठ महादेवजी को संतुष्ट करके अपनी शुभ कामनाएँ प्राप्त कर चुके हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 70-71h
 
 
श्लोक  13.15.70-71h 
इहैनं दैवतश्रेष्ठं देवा: सर्षिगणा: पुरा।
तपसा ब्रह्मचर्येण सत्येन च दमेन च॥ ७०॥
तोषयित्वा शुभान् कामान् प्राप्तवन्तो जनार्दन।
 
 
अनुवाद
जनार्दन! यहाँ अनेक देवता और ऋषिगण तप, ब्रह्मचर्य, सत्य और संयम के द्वारा देवताओं में श्रेष्ठ महादेवजी को संतुष्ट करके अपनी शुभ कामनाएँ प्राप्त कर चुके हैं।
 
Janardan! Here, many gods and sages have already achieved their auspicious desires by satisfying the greatest of the gods, Mahadevji, through austerity, celibacy, truth and self-control. 70 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)