Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.52: सामने से नाना प्रकार के पुष्पों के परागों से भरी हुई तथा हाथियों के मदिरा की सुगन्ध से सुवासित एक मृदु, अनुकूल वायु आ रही थी; जिसमें दिव्य सुन्दरियों के मधुर गान की मनमोहक ध्वनि विशेष रूप से व्याप्त थी॥52॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सामने से नाना प्रकार के पुष्पों के परागों से भरी हुई तथा हाथियों के मदिरा की सुगन्ध से सुवासित एक मृदु, अनुकूल वायु आ रही थी; जिसमें दिव्य सुन्दरियों के मधुर गान की मनमोहक ध्वनि विशेष रूप से व्याप्त थी॥52॥
A gentle, favorable breeze was coming from the front, filled with pollen of different types of flowers and fragrant with the fragrance of elephants' liquor; In which the captivating sound of the sweet songs of divine beauties was especially prevalent. 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥