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mahabharat 13.15.421: आपमें समझने और विचार करने की शक्ति है। जो लोग आपकी शरण में आकर पूर्णतः आप पर आश्रित रहते हैं, वे ध्यानस्थ, सदैव योग में तत्पर, सत्य निश्चय वाले और अपनी इन्द्रियों को वश में रखने वाले हो जाते हैं ॥421॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 421
 
 
श्लोक  13.15.421 
त्वयि बुद्धिर्मतिर्लोका: प्रपन्ना: संश्रिताश्च ये।
ध्यानिनो नित्ययोगाश्च सत्यसत्त्वा जितेन्द्रिया:॥ ४२१॥
 
 
अनुवाद
आपमें समझने और विचार करने की शक्ति है। जो लोग आपकी शरण में आकर पूर्णतः आप पर आश्रित रहते हैं, वे ध्यानस्थ, सदैव योग में तत्पर, सत्य निश्चय वाले और अपनी इन्द्रियों को वश में रखने वाले हो जाते हैं ॥421॥
 
You have the power of understanding and contemplation. Those who come to your refuge and remain completely dependent on you, they become meditative, always engaged in yoga, have true resolve and control over their senses. ॥ 421॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)