Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.419: आपके कान सर्वत्र हैं और आप ही जगत् में व्याप्त होकर सर्वत्र विद्यमान हैं। जीव के नेत्रों के खुलने और बन्द होने से लेकर उसके समस्त कर्मों तक, उन समस्त कर्मों का फल आप ही हैं॥419॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आपके कान सर्वत्र हैं और आप ही जगत् में व्याप्त होकर सर्वत्र विद्यमान हैं। जीव के नेत्रों के खुलने और बन्द होने से लेकर उसके समस्त कर्मों तक, उन समस्त कर्मों का फल आप ही हैं॥419॥
You have ears everywhere and you are present in the world pervading everything. From the opening and closing of the eyes of a living being to all his actions, you are the fruit of all those actions.॥ 419॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥