Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.41-42: इस प्रकार जाम्बवती के द्वारा स्वस्तिवाचन कराकर मैं उस राजकुमारी की अनुमति लेकर पुरुषोत्तम पिता वसुदेव, माता देवकी और राजा उग्रसेन के समीप गया। वहाँ जाकर विद्याधर राजकुमारी जाम्बवती ने मुझसे जो कुछ प्रार्थना की थी, वह सब मुझे बताई और उनसे तपस्या के लिए जाने की अनुमति ली। गधे और अत्यंत बलवान बलरामजी को विदा किया। उन दोनों ने उस समय बड़े दुःख और प्रेम से मुझसे कहा - 'भैया! तुम्हारा तप निर्विघ्न पूर्ण हो।' 41-42॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार जाम्बवती के द्वारा स्वस्तिवाचन कराकर मैं उस राजकुमारी की अनुमति लेकर पुरुषोत्तम पिता वसुदेव, माता देवकी और राजा उग्रसेन के समीप गया। वहाँ जाकर विद्याधर राजकुमारी जाम्बवती ने मुझसे जो कुछ प्रार्थना की थी, वह सब मुझे बताई और उनसे तपस्या के लिए जाने की अनुमति ली। गधे और अत्यंत बलवान बलरामजी को विदा किया। उन दोनों ने उस समय बड़े दुःख और प्रेम से मुझसे कहा - 'भैया! तुम्हारा तप निर्विघ्न पूर्ण हो।' 41-42॥
In this way, after reciting Swastiva through Jambavati, I took the permission of that princess and went near the best of men, father Vasudev, mother Devaki and King Ugrasen. Going there, Vidyadhar princess Jambavati told me all the prayers she had prayed to me and took permission from them to go for penance. Said goodbye to the donkey and extremely strong Balramji. Both of them said to me with great sadness and love at that time – 'Brother! May your penance be completed without any obstacles. 41-42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥