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mahabharat 13.15.387: भगवान के सिर पर मुकुट था। उनके हाथों में गदा, त्रिशूल और दंड था। उनके सिर पर जटाएँ थीं। उन्होंने बाघ की खाल पहनी थी। पिनाक और वज्र भी उनकी सुंदरता में चार चाँद लगा रहे थे। उनकी दाढ़ें तीक्ष्ण थीं। उन्होंने सुंदर बाजूबंद और सर्पाकार जनेऊ धारण किया था।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.15.387 
किरीटिनं गदिनं शूलपाणिं
व्याघ्राजिनं जटिलं दण्डपाणिम्।
पिनाकिनं वज्रिणं तीक्ष्णदंष्ट्रं
शुभाङ्गदं व्यालयज्ञोपवीतम्॥ ३८७॥
 
 
अनुवाद
भगवान के सिर पर मुकुट था। उनके हाथों में गदा, त्रिशूल और दंड था। उनके सिर पर जटाएँ थीं। उन्होंने बाघ की खाल पहनी थी। पिनाक और वज्र भी उनकी सुंदरता में चार चाँद लगा रहे थे। उनकी दाढ़ें तीक्ष्ण थीं। उन्होंने सुंदर बाजूबंद और सर्पाकार जनेऊ धारण किया था।
 
The Lord had a crown on his head. He held a mace, trident and a stick in his hands. He had matted hair on his head. He wore a tiger skin. Pinaka and Vajra also enhanced his beauty. His molars were sharp. He wore beautiful armlets and a serpentine sacred thread.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)