Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.362: पुत्र! तुम यहाँ इच्छानुसार रह सकते हो। किसी भी बात की चिंता मत करो। हे ब्राह्मण! यदि तुम मेरा स्मरण करोगे, तो मैं तुम्हारे समक्ष पुनः प्रकट हो जाऊँगा। 362। | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तिष्ठ वत्स यथाकामं नोत्कण्ठां च करिष्यसि।
स्मृतस्त्वया पुनर्विप्र करिष्यामि च दर्शनम्॥ ३६२॥
अनुवाद
पुत्र! तुम यहाँ इच्छानुसार रह सकते हो। किसी भी बात की चिंता मत करो। हे ब्राह्मण! यदि तुम मेरा स्मरण करोगे, तो मैं तुम्हारे समक्ष पुनः प्रकट हो जाऊँगा। 362।
Son! You can stay here as you wish. Never worry about anything. O Brahmin! If you remember me, I will appear before you again. 362.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥