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mahabharat 13.15.326-327h: आप ही समस्त लोकों के मूल हैं। आप ही उनका नाश करने वाले काल हैं। संसार में जो भी अन्य पदार्थ तेज में श्रेष्ठ हैं, वे सब आप ही हैं, परमेश्वर हैं - ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है ॥326 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 326-327h
 
 
श्लोक  13.15.326-327h 
आदिस्त्वमसि लोकानां संहर्ता काल एव च।
यच्चान्यदपि लोके वै सर्वतेजोऽधिकं स्मृतम्॥ ३२६॥
तत् सर्वं भगवानेव इति मे निश्चिता मति:।
 
 
अनुवाद
आप ही समस्त लोकों के मूल हैं। आप ही उनका नाश करने वाले काल हैं। संसार में जो भी अन्य पदार्थ तेज में श्रेष्ठ हैं, वे सब आप ही हैं, परमेश्वर हैं - ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है ॥326 1/2॥
 
You are the origin of all the worlds. You are the time that destroys them. Whatever other things in the world are superior in brilliance, they are all You, the Supreme Lord - this is my firm belief. ॥ 326 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)