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mahabharat 13.15.310: जो मेघ के समान गम्भीर शब्द करते हैं, अनेक भ्रमों के आधार हैं, जो बीज और क्षेत्र का पालन करते हैं और जो जगत के रचयिता हैं, उन भगवान शिव को बार-बार नमस्कार है ॥310॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 310
 
 
श्लोक  13.15.310 
नमो मेघनिनादाय बहुमायाधराय च।
बीजक्षेत्राभिपालाय स्रष्ट्राराय नमो नम:॥ ३१०॥
 
 
अनुवाद
जो मेघ के समान गम्भीर शब्द करते हैं, अनेक भ्रमों के आधार हैं, जो बीज और क्षेत्र का पालन करते हैं और जो जगत के रचयिता हैं, उन भगवान शिव को बार-बार नमस्कार है ॥310॥
 
Salutations again and again to Lord Shiva who makes a deep sound like that of a cloud and is the basis of numerous illusions, who maintains the seed and the field and who is the creator of the universe. ॥ 310॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)