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mahabharat 13.15.308: सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि तीन नेत्रों का रूप धारण करके आपको त्रिनेत्रधारी बनाते हैं। आपके लाखों नेत्र हैं। आप स्त्री, पुरुष और नपुंसक हैं। आप सांख्य के ज्ञाता और योगी हैं। आपको नमस्कार है। 308   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.15.308 
नमस्त्रिनेत्रनेत्राय सहस्रशतलोचने।
स्त्रीपुंसाय नपुंसाय नम: सांख्याय योगिने॥ ३०८॥
 
 
अनुवाद
सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि तीन नेत्रों का रूप धारण करके आपको त्रिनेत्रधारी बनाते हैं। आपके लाखों नेत्र हैं। आप स्त्री, पुरुष और नपुंसक हैं। आप सांख्य के ज्ञाता और योगी हैं। आपको नमस्कार है। 308
 
Sun, moon and fire take the form of three eyes and make you three-eyed. You have millions of eyes. You are a woman, a man and a eunuch. You are the knower of Sankhya and a Yogi. Salutations to you. 308.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)