Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.301: आपकी कांति श्वेत मेघों के समान है। आपकी कांति सूर्य के संध्याकाल के रंग के समान है। आपका कोई विशिष्ट नाम नहीं है। आप सदैव अपने मूल स्वरूप में ही रहते हैं। आपको नमस्कार है ॥301॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आपकी कांति श्वेत मेघों के समान है। आपकी कांति सूर्य के संध्याकाल के रंग के समान है। आपका कोई विशिष्ट नाम नहीं है। आप सदैव अपने मूल स्वरूप में ही रहते हैं। आपको नमस्कार है ॥301॥
Your radiance is like that of white clouds. Your radiance is like the evening colour of the sun. You do not have any specific name. You always remain in your original form. Salutations to you. ॥ 301॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥