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mahabharat 13.15.294: आप वायु के समान वेगवान हैं। आपको नमस्कार है। आप मेरे आराध्य देव हैं। आपको बारंबार नमस्कार है। आप सुरेन्द्र, मुनीन्द्र और महेन्द्र हैं। आपको नमस्कार है।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 294
 
 
श्लोक  13.15.294 
नम: पवनवेगाय नमो देवाय वै नम:।
सुरेन्द्राय मुनीन्द्राय महेन्द्राय नमोऽस्तु ते॥ २९४॥
 
 
अनुवाद
आप वायु के समान वेगवान हैं। आपको नमस्कार है। आप मेरे आराध्य देव हैं। आपको बारंबार नमस्कार है। आप सुरेन्द्र, मुनीन्द्र और महेन्द्र हैं। आपको नमस्कार है।
 
You are as fast as the wind. Salutations to you. You are my worshipable deity. Salutations to you again and again. You are Surendra, Munindra and Mahendra. Salutations to you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)