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mahabharat 13.15.279: मैंने देखा कि नंदी महादेव के सामने खड़े हैं, और उनके हाथ में एक अन्य शंकराचार्य की तरह भाला है।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 279
 
 
श्लोक  13.15.279 
पुरस्ताच्चैव देवस्य नन्दिं पश्याम्यवस्थितम्।
शूलं विष्टभ्य तिष्ठन्तं द्वितीयमिव शंकरम्॥ २७९॥
 
 
अनुवाद
मैंने देखा कि नंदी महादेव के सामने खड़े हैं, और उनके हाथ में एक अन्य शंकराचार्य की तरह भाला है।
 
I saw Nandi standing before Mahadeva, holding a spear like another Shankara. 279.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)