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mahabharat 13.15.278: कुमार स्कंद देवी पार्वती के पास मोरपंख पर सवार होकर, हाथों में भाला और घंटा लिए खड़े थे। वे अग्नि के समान चमक रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 278
 
 
श्लोक  13.15.278 
स्कन्दो मयूरमास्थाय स्थितो देव्या: समीपत:।
शक्तिघण्टे समादाय द्वितीय इव पावक:॥ २७८॥
 
 
अनुवाद
कुमार स्कंद देवी पार्वती के पास मोरपंख पर सवार होकर, हाथों में भाला और घंटा लिए खड़े थे। वे अग्नि के समान चमक रहे थे।
 
Kumar Skanda was standing beside Goddess Parvati riding on a peacock feather, holding a spear and a bell in his hands. He was glowing like another fire. 278.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)