Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.257: उसके सात फन थे। उसका शरीर भी विशाल था। तीखे दाँत दिखाई दे रहे थे। वह अपने घातक विष के कारण मदहोश हो रहा था। उसकी विशाल गर्दन धनुष की डोरी से ढँकी हुई थी। वह पुरुष रूप में खड़ा था। 257 | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसके सात फन थे। उसका शरीर भी विशाल था। तीखे दाँत दिखाई दे रहे थे। वह अपने घातक विष के कारण मदहोश हो रहा था। उसकी विशाल गर्दन धनुष की डोरी से ढँकी हुई थी। वह पुरुष रूप में खड़ा था। 257
He had seven hoods. His physique was also huge. Sharp teeth were visible. He was getting intoxicated due to his deadly poison. His huge neck was covered with a bowstring. He was standing in the form of a man. 257.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥