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mahabharat 13.15.254: भगवान् के उज्ज्वल गौर विग्रह पर स्वर्णकमलों से गुथी हुई रत्नजटित माला बड़ी शोभा दे रही थी ॥254॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 254
 
 
श्लोक  13.15.254 
अशोभतास्य देवस्य माला गात्रो सितप्रभे।
जातरूपमयै: पद्मैर्ग्रथिता रत्नभूषिता॥ २५४॥
 
 
अनुवाद
भगवान् के उज्ज्वल गौर विग्रह पर स्वर्णकमलों से गुथी हुई रत्नजटित माला बड़ी शोभा दे रही थी ॥254॥
 
The jewel-encrusted garland entwined with golden lotuses was giving great beauty on the bright effulgent Gaur Deity of the Lord. 254॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)