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mahabharat 13.15.202: हे शर्करा! मन, बुद्धि, अहंकार, पंचतन्मात्रा और दसों इन्द्रियों को कौन उत्पन्न कर सकता है, तथा भगवान शिव से कौन भिन्न या श्रेष्ठ है? यह मुझे बताइए। 202॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 202
 
 
श्लोक  13.15.202 
मनो मतिरहंकारस्तन्मात्राणीन्द्रियाणि च।
ब्रूहि चैषां भवेच्छक्र कोऽन्योऽस्ति परमं शिवात्॥ २०२॥
 
 
अनुवाद
हे शर्करा! मन, बुद्धि, अहंकार, पंचतन्मात्रा और दसों इन्द्रियों को कौन उत्पन्न कर सकता है, तथा भगवान शिव से कौन भिन्न या श्रेष्ठ है? यह मुझे बताइए। 202॥
 
Sugar! Who can create the mind, intellect, ego, Panchatanamatra and ten senses, who is different from or superior to Lord Shiva? Tell me this. 202॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)