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mahabharat 13.15.200: जिन महादेवजी ने पूर्वकाल में आकाशमय ब्रह्माण्ड की रचना की थी और जो जगत के रचयिता ब्रह्माजी हैं, उन्हीं से हम वर प्राप्त करना चाहते हैं ॥200॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 200
 
 
श्लोक  13.15.200 
य: पूर्वमसृजद् देवं ब्रह्माणं लोकभावनम्।
अण्डमाकाशमापूर्य वरं तस्माद् वृणीमहे॥ २००॥
 
 
अनुवाद
जिन महादेवजी ने पूर्वकाल में आकाशमय ब्रह्माण्ड की रचना की थी और जो जगत के रचयिता ब्रह्माजी हैं, उन्हीं से हम वर प्राप्त करना चाहते हैं ॥200॥
 
We wish to obtain a boon from the same Mahadeva who in the past had created the sky-wide universe and the creator of the world, Lord Brahma. ॥200॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)