Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.2: जो विशाल जगत् के स्वरूप हैं और अव्यक्त के भी कारण हैं, उन गुरु भगवान शंकर की महिमा का यथार्थ रूप से वर्णन कीजिए। 2॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बभ्रवे विश्वरूपाय महाभाग्यं च तत्त्वत:।
सुरासुरगुरौ देवे शंकरेऽव्यक्तयोनये॥ २॥
अनुवाद
जो विशाल जगत् के स्वरूप हैं और अव्यक्त के भी कारण हैं, उन गुरु भगवान शंकर की महिमा का यथार्थ रूप से वर्णन कीजिए। 2॥
Describe accurately the greatness of Lord Shankar, the spiritual master who is the embodiment of the vast world and is also the reason for the unmanifested. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥