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mahabharat 13.15.164: भगवान शंकर प्राण, मन और आत्मा के रूप में प्राणियों के हृदय में निवास करते हैं। वे योग, योगी, ध्यान और ईश्वर के स्वरूप हैं। भगवान महेश्वर केवल भक्ति से ही स्वीकार किए जाते हैं ॥164॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 164
 
 
श्लोक  13.15.164 
हृदि प्राणो मनो जीवो योगात्मा योगसंज्ञित:।
ध्यानं तत्परमात्मा च भावग्राह्यो महेश्वर:॥ १६४॥
 
 
अनुवाद
भगवान शंकर प्राण, मन और आत्मा के रूप में प्राणियों के हृदय में निवास करते हैं। वे योग, योगी, ध्यान और ईश्वर के स्वरूप हैं। भगवान महेश्वर केवल भक्ति से ही स्वीकार किए जाते हैं ॥164॥
 
Lord Shankar resides in the hearts of living beings in the form of life, mind and soul. He is the embodiment of Yoga, Yogi, meditation and God. Lord Maheshwar is accepted only with devotion. 164॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)