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mahabharat 13.15.153: मनुष्य जो कुछ भी चाहता है और जिस उद्देश्य से भगवान की पूजा करता है, भगवान शिव सब कुछ जानते हैं। इसलिए यदि तुम्हें कुछ चाहिए तो उनकी शरण में जाओ ॥153॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 153
 
 
श्लोक  13.15.153 
यो हि यं कामयेत् कामं यस्मिन्नर्थेऽर्च्यते पुन:।
तत् सर्वं वेत्ति देवेशस्तं प्रपद्य यदीच्छसि॥ १५३॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य जो कुछ भी चाहता है और जिस उद्देश्य से भगवान की पूजा करता है, भगवान शिव सब कुछ जानते हैं। इसलिए यदि तुम्हें कुछ चाहिए तो उनकी शरण में जाओ ॥153॥
 
Whatever a person desires and for what purpose he worships the Lord, Lord Shiva knows it all. Therefore, if you want anything, seek His refuge. ॥153॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)