Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.152: वे सम्पूर्ण जगत् के अन्तर्यामी, सर्वव्यापी और सर्वव्यापक हैं, उन भगवान शिव को सर्वत्र और समस्त प्राणियों के हृदय में विद्यमान जानना चाहिए ॥152॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्वलोकान्तरात्मा च सर्वग: सर्ववाद्यपि।
सर्वत्र भगवान् ज्ञेयो हृदिस्थ: सर्वदेहिनाम्॥ १५२॥
अनुवाद
वे सम्पूर्ण जगत् के अन्तर्यामी, सर्वव्यापी और सर्वव्यापक हैं, उन भगवान शिव को सर्वत्र और समस्त प्राणियों के हृदय में विद्यमान जानना चाहिए ॥152॥
He is the inner soul of the entire world, omnipresent and universal, that Lord Shiva should be known to be present everywhere and in the hearts of all living beings. 152॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥