Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.150: वे ऋषि और गंधर्व रूप में हैं। वे सिद्ध और चारण का भी रूप धारण करते हैं। भस्म रमाए होने के कारण उनका पूरा शरीर श्वेत दिखाई देता है। वे अपने माथे पर अर्धचंद्राकार आभूषण धारण करते हैं। | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे ऋषि और गंधर्व रूप में हैं। वे सिद्ध और चारण का भी रूप धारण करते हैं। भस्म रमाए होने के कारण उनका पूरा शरीर श्वेत दिखाई देता है। वे अपने माथे पर अर्धचंद्राकार आभूषण धारण करते हैं।
He is in the form of a sage and a Gandharva. He also assumes the form of a Siddha and a Charan. His entire body appears white due to the ash smeared on it. He wears a half-moon ornament on his forehead.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥