Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.137-138h: वे विश्वरूपी महेश्वर समस्त प्राणियों के हृदयरूपी मन्दिर में निवास करते हैं। वे भक्तों को किस प्रकार दर्शन देकर उनका कल्याण करते हैं? शंकरजी के दिव्य एवं मंगलमय चरित्र का वर्णन करने वाले ऋषियों से मैंने जो सुना है, वह मैं तुम्हें सुनाता हूँ। 137 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे विश्वरूपी महेश्वर समस्त प्राणियों के हृदयरूपी मन्दिर में निवास करते हैं। वे भक्तों को किस प्रकार दर्शन देकर उनका कल्याण करते हैं? शंकरजी के दिव्य एवं मंगलमय चरित्र का वर्णन करने वाले ऋषियों से मैंने जो सुना है, वह मैं तुम्हें सुनाता हूँ। 137 1/2॥
That world-form Maheshwar resides in the temple of the heart of all living beings. How does He appear to the devotees to bless them? I will tell you what I have heard from the sages who describe the divine and auspicious character of Shankarji. 137 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥