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mahabharat 13.15.128: "बेटा! उन्हीं भगवान शंकर की सदैव पूर्ण मन से शरणागति करके, उनकी कृपा से ही तुम मनोवांछित फल प्राप्त कर सकोगे।" ॥128॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  13.15.128 
तं प्रपद्य सदा वत्स सर्वभावेन शङ्करम्।
तत्प्रसादाच्च कामेभ्य: फलं प्राप्स्यसि पुत्रक॥ १२८॥
 
 
अनुवाद
"बेटा! उन्हीं भगवान शंकर की सदैव पूर्ण मन से शरणागति करके, उनकी कृपा से ही तुम मनोवांछित फल प्राप्त कर सकोगे।" ॥128॥
 
"Son! By always surrendering to the same Lord Shankar with all your heart, you will be able to achieve the desired results only by his grace." ॥128॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)