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mahabharat 13.15.116-117h: घर में दूध की कमी थी, इसलिए उस समय मेरी माता बहुत दुःखी हुई। माधव! तब वह पानी में आटा मिलाकर ले आई और उसे दूध कहकर दोनों भाइयों को पिला दिया।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 116-117h
 
 
श्लोक  13.15.116-117h 
अभावाच्चैव दुग्धस्य दु:खिता जननी तदा।
तत: पिष्टं समालोड्य तोयेन सह माधव॥ ११६॥
आवयो: क्षीरमित्येव पानार्थं समुपानयत्।
 
 
अनुवाद
घर में दूध की कमी थी, इसलिए उस समय मेरी माता बहुत दुःखी हुई। माधव! तब वह पानी में आटा मिलाकर ले आई और उसे दूध कहकर दोनों भाइयों को पिला दिया।
 
There was a shortage of milk in the house; therefore my mother was very sad at that time. Madhava! Then she mixed flour in water and brought it and gave it to both the brothers to drink, calling it milk. 116 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)