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mahabharat 13.15.103: सत्ययुग में सवर्ण नामक एक प्रसिद्ध ऋषि हुए थे, जिन्होंने यहाँ आकर छः हजार वर्षों तक तपस्या की थी।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.15.103 
सावर्णिश्चापि विख्यात ऋषिरासीत् कृते युगे।
इह तेन तपस्तप्तं षष्टिवर्षशतान्यथ॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
सत्ययुग में सवर्ण नामक एक प्रसिद्ध ऋषि हुए थे, जिन्होंने यहाँ आकर छः हजार वर्षों तक तपस्या की थी।
 
In Satyayuga, there was a famous sage named Savarna. He came here and did penance for six thousand years. 103.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)