Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.149.8-9h: जो किसी भी वस्तु में आसक्त नहीं होते, जो किसी की हत्या करने से दूर रहते हैं, जो सदाचारी और दयालु हैं, वे भी कर्म के बंधन में नहीं पड़ते। जिनके लिए शत्रु और प्रिय मित्र दोनों एक ही हैं, जिन्होंने इन्द्रियों को वश में कर लिया है, वे कर्म के बंधन से मुक्त हो जाते हैं। | mahabharat अध्याय 13.149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये न सज्जन्ति कस्मिंश्चित् ते न बद्ध्यन्ति कर्मभि:।
प्राणातिपाताद् विरता: शीलवन्तो दयान्विता:॥ ८॥
तुल्यद्वेष्यप्रिया दान्ता मुच्यन्ते कर्मबन्धनै:।
अनुवाद
जो किसी भी वस्तु में आसक्त नहीं होते, जो किसी की हत्या करने से दूर रहते हैं, जो सदाचारी और दयालु हैं, वे भी कर्म के बंधन में नहीं पड़ते। जिनके लिए शत्रु और प्रिय मित्र दोनों एक ही हैं, जिन्होंने इन्द्रियों को वश में कर लिया है, वे कर्म के बंधन से मुक्त हो जाते हैं।
Those who are not attached to anything, who stay away from killing anyone, who are well behaved and kind, they too do not fall into the bondage of karma. Those for whom both the enemy and the dear friend are the same, those who have controlled the senses become free from the bondage of karma. 8 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥