Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.149.7: जो मन, वाणी और कर्म से किसी को कष्ट नहीं पहुँचाते तथा जिनकी आसक्ति पूर्णतः दूर हो गई है, वे कर्म बंधनों से मुक्त हो जाते हैं। | mahabharat अध्याय 13.149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वीतरागा विमुच्यन्ते पुरुषा: कर्मबन्धनै:।
कर्मणा मनसा वाचा ये न हिंसन्ति किंचन॥ ७॥
अनुवाद
जो मन, वाणी और कर्म से किसी को कष्ट नहीं पहुँचाते तथा जिनकी आसक्ति पूर्णतः दूर हो गई है, वे कर्म बंधनों से मुक्त हो जाते हैं।
Those who do not harm anyone by thought, speech and action and whose attachment has been completely removed, are liberated from the bondages of karma. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥