Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.149.6: जो महात्मा सब प्रकार के संशय से दूर हो गए हैं, जो प्रलय और उत्पत्ति के तत्त्व को जानते हैं, जो सर्वज्ञ और सर्वदर्शी हैं, वे न तो धर्म से बँधते हैं और न अधर्म से ॥6॥ | mahabharat अध्याय 13.149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नाधर्मेण न धर्मेण बध्यन्ते छिन्नसंशया:।
प्रलयोत्पत्तितत्त्वज्ञा: सर्वज्ञा: सर्वदर्शिन:॥ ६॥
अनुवाद
जो महात्मा सब प्रकार के संशय से दूर हो गए हैं, जो प्रलय और उत्पत्ति के तत्त्व को जानते हैं, जो सर्वज्ञ और सर्वदर्शी हैं, वे न तो धर्म से बँधते हैं और न अधर्म से ॥6॥
Those Mahatmas who have gone away from all kinds of doubts, who know the elements of destruction and origin, who are omniscient and all-seeing, are neither bound by religion nor by unrighteousness. 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥