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mahabharat 13.149.59: अथवा यदि कदाचित् मनुष्य लोक में जन्म ले तो वह मनुष्य दीर्घायु होकर सुखी होगा ॥59॥   |   mahabharat अध्याय 13.149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  13.149.59 
अथ चेन्मानुषे लोके कदाचिदुपपद्यते।
तत्र दीर्घायुरुत्पन्न: स नर: सुखमेधते॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
अथवा यदि कदाचित् मनुष्य लोक में जन्म ले तो वह मनुष्य दीर्घायु होकर सुखी होगा ॥59॥
 
Or if perhaps he is born in the human world, then that person will live long and be happy. 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)