Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.149.51-52: जिसका स्वभाव इसके विपरीत है, वह धार्मिक और सुन्दर है। देवि! जो मनुष्य हिंसाप्रिय है, वह अपने पापकर्मों के कारण दूसरों को मारता है, समस्त प्राणियों को अप्रिय होता है और अल्पायु होता है। 51-52॥ | mahabharat अध्याय 13.149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिसका स्वभाव इसके विपरीत है, वह धार्मिक और सुन्दर है। देवि! जो मनुष्य हिंसाप्रिय है, वह अपने पापकर्मों के कारण दूसरों को मारता है, समस्त प्राणियों को अप्रिय होता है और अल्पायु होता है। 51-52॥
One whose nature is opposite to this is religious and beautiful. Goddess! A man who loves violence, because of his sinful actions, kills others and is unpleasant to all living beings and has a short life. 51-52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥