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mahabharat 13.149.42: हे प्रभु! किस कर्म से मनुष्य दीर्घायु प्राप्त करता है? और हे देवेश्वर! किस तप से मनुष्य दीर्घायु प्राप्त करता है? 42॥   |   mahabharat अध्याय 13.149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  13.149.42 
केनायुर्लभते दीर्घं कर्मणा पुरुष: प्रभो।
तपसा वापि देवेश केनायुर्लभते महत्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! किस कर्म से मनुष्य दीर्घायु प्राप्त करता है? और हे देवेश्वर! किस तप से मनुष्य दीर्घायु प्राप्त करता है? 42॥
 
Lord! By what action does a man attain longevity? And Deveshwar! By which penance does a man attain a long life? 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)