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mahabharat 13.149.36: जो किसी के प्रति द्वेष नहीं रखते, जो निष्काम हैं, जिनका हृदय मैत्री से भरा हुआ है और जो सब प्राणियों पर सदैव दया करते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं ॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 13.149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.149.36 
अवैरा ये त्वनायासा मैत्रीचित्तरता: सदा।
सर्वभूतदयावन्तस्ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जो किसी के प्रति द्वेष नहीं रखते, जो निष्काम हैं, जिनका हृदय मैत्री से भरा हुआ है और जो सब प्राणियों पर सदैव दया करते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं ॥ 36॥
 
Those who have no animosity towards anyone, who are without effort, whose hearts are filled with friendship and who always have compassion towards all living beings, go to heaven. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)