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mahabharat 13.149.33: इसी प्रकार जो पुरुष एकान्त में अन्य स्त्रियों से मिलकर उनके साथ अन्याय करने का विचार भी नहीं करते, वे स्वर्ग को जाते हैं ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 13.149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 149: बन्धन-मुक्ति, स्वर्ग, नरक एवं दीर्घायु और अल्पायु प्रदान करनेवाले शरीर, वाणी और मनद्वारा किये जानेवाले शुभाशुभ कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  13.149.33 
तथैव परदारान् ये कामवृत्तान् रहोगतान्।
मनसापि न हिंसन्ति ते नरा: स्वर्गगामिन:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार जो पुरुष एकान्त में अन्य स्त्रियों से मिलकर उनके साथ अन्याय करने का विचार भी नहीं करते, वे स्वर्ग को जाते हैं ॥33॥
 
Similarly, those men who, when they meet other women in solitude and do not even think of doing injustice to them, go to heaven. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)